फेसबुक ने शुक्रवार को खुलासा किया है जो आपके न पोस्ट किए गए फोटोज को भी पब्लिक कर सकता था. कई बार यूजर्स Only Me करके पोस्ट करते हैं. इसके अलावा ये बग यूजर्स के फेसबुक ऐप के टाइमलाइन फोटोज, फेसबुक स्टोरीज, मार्केट प्लेस फोटोज और वैसे फोटोज जिसे यूजर्स ने सिर्फ फेसबुक पर अपलोड किया है, लेकिन शेयर नहीं किया. ऐसे कॉन्टेंट पब्लिक करने वाला ये बग था जिसे अब ठीक कर लिया गया है.
यह बग फेसबुक पर लगभग दो हफ्तों तक रहा, लेकिन इससे लगभग 6.8 मिलियन यूजर्स प्रभावित हुए हैं. इसके अलावा इस बग से 876 डेवलपर्स द्वारा तैयार किए गए 1500 ऐप्स भी प्रभावित हुए हैं.
आपका फेसबुक अकाउंट इससे प्रभावित है या नहीं ये जानना आपके लिए जरूरी है. अगर आप जानना चाहते हैं तो इसके लिए फेसबुक ने एक टूल जारी किया है. फेसबुक एक पेज बनाया है जहां से आप ये जान सकते हैं कि इस बग की वजह से आपकी तस्वीरें एक्सपोज हुई हैं या नहीं.
इस लिंक पर क्लिक करके पहले आपको अपने फेसबुक अकाउंट से लॉग इन करना होगा. अगर आप इससे प्रभावित हैं तो आपको क्या करना है इसके इंस्ट्रक्शन यहां पेज पर दिखेंगे.
जांच शुरू
आयरलैंड की डेटा प्रोटेक्शन संस्था ने फेसबुक की जांच शुरू कर दी है. ये जांच शुक्रवार को शुरू की गई. आइरिश डेटा प्रोटेक्शन कमीशन (डीपीसी) की जांच नए सख्त यूरोपीय निजता कानूनों के तहत होगी.
ऐसी ही जांच अक्टूबर में भी की गई थी जब फेसबुक ने पांच करोड़ यूजर्स के अकाउंट की सुरक्षा में सेंध लगने की बात स्वीकार की थी. संचार प्रमुख ग्राहम डॉयले ने कहा, ‘आइरिश डीपीसी को 25 मई 2018 को जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन के आने के बाद से फेसबुक से सुरक्षा में सेंध लगने के कई नोटिफिकेशन मिले हैं.’
कमलेश की हत्या के सभी आरोपी संदीप मेंटल गैंग के शार्प शूटर बताए जा रहे हैं. संदीप मेंटल और उसके दोस्त पवन की हत्या 2 मई को नजफगढ़ इलाके में कर दी गई थी. उसके बाद से संदीप मेंटल गैंग को उसका भाई सोनू चला रहा था. पुलिस का कहना है कि संदीप मेंटल के भाई सोनू को शक था कि राजीव नाम के शख्स ने संदीप मेंटल की हत्या करवाई है और उसे इसके लिए कमलेश ने ही उकसाया था.
इसके बाद से ही सेंदीप मेंटल के शूटर कमलेश की हत्या करने की फिराक में लगे थे. पुलिस को इस मामले में अभी संदीप के भाई और एक दूसरे शूटर की तलाश है. 8 महीने में हुए इन तीन कत्ल के पीछे 8 फ्लैट बताए जा रहे हैं, जो कभी संदीप मेंटल ने बनवाए थे. इन्हीं पर कब्जे को लेकर पहले संदीप और पवन की हत्या हुई और फिर कमलेश की. पुलिस का कहना है कि वो इस केस से जुड़े सभी लोगों की तलाश में कर रही है ताकि इस गैंगवार को रोका जा सके.
पीड़िता मंजू के मुताबिक वह 14 दिसंबर को रानी बाग पुलिस थाने में गई लेकिन पुलिस ने उसकी कुछ भी नहीं सुनी. उलटा डांटते-फटकारते रहे. पुलिस ने महिला को ही गलत बताया और पैसे के लिए ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया. पीड़िता के मुताबिक पुलिस ने आरोपियों की ऊंची पकड़ की भी बात की और चुप रहने को कहा.
Tuesday, December 18, 2018
Friday, December 14, 2018
650 कत्लः कुंवारी लड़कियों के खून से नहाती थी ये सीरियल किलर
दुनियाभर में सीरियल किलिंग के मामले इतिहास में दर्ज हैं. लेकिन इन कातिलों में कुछ ऐसी महिलाएं भी शामिल हैं, जिनके नाम सुनकर लोग दहशत से कांपने लगते थे. लोगों की रूह कांप उठती थी. ऐसी ही एक महिला सीरियल किलर थी एलिजाबेथ बाथरी. जो कुंवारी लड़कियों के खून से नहाती थी.
हाई प्रोफाइल सीरियल किलर
सीरियल किलर एलिजाबेथ बाथरी की खौफनाक दास्तान करीब 400 साल पुरानी है. वो बहुत ही हाई प्रोफाइल महिला थी. इतिहास के पन्नों में दर्ज उसकी खूनी कहानी के मुताबिक हंगरी साम्राज्य की उस सीरियल किलर ने 1585 से 1610 के बीच अपने महल में करीब 600 से ज्यादा लड़कियों को मौत के घाट उतारा था.
हमेशा जवान रहना चाहती थी एलिजाबेथ
एलिजाबेथ बाथरी को न जाने कहां से पता चल गया था कि अगर वो कुंवारी लड़कियों के खून से नहाएगी तो जिंदगीभर जवान और खूबसूरत बनी रहेगी. बस उसके इसी लालच ने उस ऐसा कातिल बना दिया कि वो मौत का दूसरा बन गई. एलिजाबेथ अपनी जवानी को बरकरार रखने के लिए कुंवारी लड़कियों का कत्ल करती थी और फिर उनके खून से नहाती थी.
कत्ल से पहले दरिंदगी
अपने शिकार को एलिजाबेथ तड़पा तड़पाकर मारती थी. वो लड़कियों की हत्या से पहले उनके साथ काफी अत्याचार करती थी. वो इस हद तक हैवान बन जाती थी कि उन लड़कियों के नाजुक अंगों को जला दिया करती थी. इस काम में उसके नौकर भी उसका साथ दिया करते थे.
महल से मिले थे नरकंकाल
दस्तावेजों के मुताबिक एलिजाबेथ ने अपने नौकरों के साथ मिलकर करीब 650 लड़कियों की निर्मम हत्या की थी. उसके महल से कई लड़कियों के कंकाल और सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए थे. 1610 में हंगरी के राजा के आदेश के बाद उसे तीन नौकरों के साथ गिरफ्तार किया गया था.
कैद में मौत
महल से ताल्लुक रखने की वजह से उसे महल में ही कैद कर दिया गया था. सजा मिलने के करीब चार साल बाद 1614 में उसकी मौत हो गई थी. एलिजाबेथ के जीवन पर कई किताबें लिखी जा चुकी हैं. यहां तक कि उस पर फिल्में भी बनाई गई हैं.
गांव की लड़कियां बनी शिकार
उपन्यासकार ब्राम स्टोकर ने उसके जीवन पर आधारित ड्रैकुला उपन्यास लिखा था. एलिजाबेथ की शादी फेरेंक नैडेस्डी नाम के शख्स से हुई थी. बताया जाता है कि उस खूंखार लेडी सीरियल किलर के निशाने पर ज्यादातर गांव की लड़कियां होती थीं. वो उन्हें आसानी से अपना शिकार बना लेती थी. उसकी खौफनाक दास्तान सदियों तक इतिहास में काले धब्बे की तरह जानी जाएगी.
हाई प्रोफाइल सीरियल किलर
सीरियल किलर एलिजाबेथ बाथरी की खौफनाक दास्तान करीब 400 साल पुरानी है. वो बहुत ही हाई प्रोफाइल महिला थी. इतिहास के पन्नों में दर्ज उसकी खूनी कहानी के मुताबिक हंगरी साम्राज्य की उस सीरियल किलर ने 1585 से 1610 के बीच अपने महल में करीब 600 से ज्यादा लड़कियों को मौत के घाट उतारा था.
हमेशा जवान रहना चाहती थी एलिजाबेथ
एलिजाबेथ बाथरी को न जाने कहां से पता चल गया था कि अगर वो कुंवारी लड़कियों के खून से नहाएगी तो जिंदगीभर जवान और खूबसूरत बनी रहेगी. बस उसके इसी लालच ने उस ऐसा कातिल बना दिया कि वो मौत का दूसरा बन गई. एलिजाबेथ अपनी जवानी को बरकरार रखने के लिए कुंवारी लड़कियों का कत्ल करती थी और फिर उनके खून से नहाती थी.
कत्ल से पहले दरिंदगी
अपने शिकार को एलिजाबेथ तड़पा तड़पाकर मारती थी. वो लड़कियों की हत्या से पहले उनके साथ काफी अत्याचार करती थी. वो इस हद तक हैवान बन जाती थी कि उन लड़कियों के नाजुक अंगों को जला दिया करती थी. इस काम में उसके नौकर भी उसका साथ दिया करते थे.
महल से मिले थे नरकंकाल
दस्तावेजों के मुताबिक एलिजाबेथ ने अपने नौकरों के साथ मिलकर करीब 650 लड़कियों की निर्मम हत्या की थी. उसके महल से कई लड़कियों के कंकाल और सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए थे. 1610 में हंगरी के राजा के आदेश के बाद उसे तीन नौकरों के साथ गिरफ्तार किया गया था.
कैद में मौत
महल से ताल्लुक रखने की वजह से उसे महल में ही कैद कर दिया गया था. सजा मिलने के करीब चार साल बाद 1614 में उसकी मौत हो गई थी. एलिजाबेथ के जीवन पर कई किताबें लिखी जा चुकी हैं. यहां तक कि उस पर फिल्में भी बनाई गई हैं.
गांव की लड़कियां बनी शिकार
उपन्यासकार ब्राम स्टोकर ने उसके जीवन पर आधारित ड्रैकुला उपन्यास लिखा था. एलिजाबेथ की शादी फेरेंक नैडेस्डी नाम के शख्स से हुई थी. बताया जाता है कि उस खूंखार लेडी सीरियल किलर के निशाने पर ज्यादातर गांव की लड़कियां होती थीं. वो उन्हें आसानी से अपना शिकार बना लेती थी. उसकी खौफनाक दास्तान सदियों तक इतिहास में काले धब्बे की तरह जानी जाएगी.
Tuesday, December 11, 2018
विजय माल्या भारत लाया जाएगा, कोर्ट ने मंजूरी दी; मामला ब्रिटिश सरकार को रेफर किया
वेस्टमिंस्टर अदालत ने सोमवार को फैसला दिया कि भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या (62) को ब्रिटेन से भारत प्रत्यर्पित किया जाए। जज एम्मा आर्बटनॉट ने कहा कि पहली नजर में माल्या के खिलाफ धोखाधड़ी, साजिश रचने और मनी लॉन्डरिंग का केस बनता है। अदालत ने यह मामला अब ब्रिटिश सरकार को भेज दिया है। फैसले से पहले कोर्ट पहुंचे माल्या ने कहा था कि मैंने रुपए लौटाने का प्रस्ताव दिया है, यह झूठा नहीं था। मेरे इस ऑफर का प्रत्यर्पण से कोई लेना-देना नहीं है। मैंने पैसे चुराए नहीं। मैंने किंगफिशर एयरलाइंस को बचाने के लिए अपने 4 हजार करोड़ रुपए इसमें लगाए थे।
माल्या पर भारतीयों बैंकों के 9,000 करोड़ रुपए बकाया हैं। वह मार्च 2016 में लंदन भाग गया था। भारत ने पिछले साल फरवरी में यूके से उसके प्रत्यर्पण की अपील की थी। भारत में फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर अप्रैल 2017 में स्कॉटलैंड यार्ड में माल्या की गिरफ्तारी हुई लेकिन, जमानत पर छूट गया। उसके प्रत्यर्पण का मामला 4 दिसंबर 2017 से लंदन की अदालत में चल रहा है।
आगे क्या
यूके की लीगल एक्सपर्ट पावनी रेड्डी के मुताबिक, यूके सरकार अदालत के फैसले से संतुष्ट होती है तो वह माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश जारी करेगी। इस फैसले के खिलाफ माल्या के पास 14 दिन में हाईकोर्ट में अपील का अधिकार होगा।
माल्या ने अगर प्रत्यर्पण के फैसले के खिलाफ अपील नहीं की तो यूके की सरकार के आदेश जारी करने के 28 दिन में उसका प्रत्यर्पण किया जाएगा।
माल्या की 5 दलीलें
माल्या का कहना है कि उसके खिलाफ मामला राजनीति से प्रेरित है। उसने एक रुपया भी उधार नहीं लिया। किंगफिशर एयरलाइंस ने लोन लिया था। कारोबार में घाटा होने की वजह से लोन की रकम खर्च हो गई। वह सिर्फ गारंटर था और यह फ्रॉड नहीं है।
वह कर्ज का 100% मूलधन चुकाने को तैयार है। उसने साल 2016 में कर्नाटक हाईकोर्ट में भी यह ऑफर दिया था। उसका कहना है कि रकम चुराकर भागने की बात गलत है। उसे बैंक डिफॉल्ट का पोस्टर बॉय बना दिया गया है।
माल्या ने यह भी कहा था कि साल 2016 में उसने प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को चिट्ठी लिखकर जांच कमेटी गठित करने की मांग की थी लेकिन, कोई जवाब नहीं मिला।
माल्या ने यह भी कहा था कि भारतीय जेलों की हालत अच्छी नहीं है। इसके बाद यूके की अदालत ने भारत से जेल का वीडियो मांगा था। भारत ने मुंबई की आर्थर रोड जेल के बैरक नंबर 12 का वीडियो भेजा था, जहां माल्या को रखा जाएगा। वीडियो देखने के बाद यूके की कोर्ट ने संतुष्टि जताई थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रत्यर्पण पर फैसले से पहले माल्या ने यह भी कहा है कि राजनीति की वजह से उसे भारत में न्याय मिलने के आसार कम हैं। उसके खिलाफ नए आरोप लग सकते हैं।
भारतीय जांच एजेंसियों की दलील
सीबीआई ने यूके की अदालत के फैसले का स्वागत किया। कहा- हमें उम्मीद है कि माल्या को जल्द भारत लाया जाएगा और हम उसके खिलाफ मामलों में नतीजे पर पहुंचेंगे।
हमने तथ्यों और कानून के आधार पर मजबूती से अपना पक्ष रखा था और हम पूरी तरह आश्वस्त थे कि माल्या को प्रत्यर्पित किया जाएगा।
माल्या ने जानबूझकर बैंकों का कर्ज नहीं चुकाया। वह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत भगोड़ा घोषित है। उस पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है। वह ब्रिटेन के कानून के मुताबिक भी आरोपी है।
अक्टूबर 2012 में किंगफिशर एयरलाइंस बंद हुई
मार्च 2012 में माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस ने यूरोप और एशिया के लिए फ्लाइट्स बंद कर दीं। घरेलू बाजार में जहां किंगफिशर हर दिन 340 फ्लाइट्स ऑपरेट करती थीं, उन्हें घटाकर 125 कर दिया गया। लेकिन यह फॉर्मूला 8 महीने भी नहीं चला। अक्टूबर 2012 में किंगफिशर की सारी फ्लाइट्स बंद हो गईं।
साल 2013-14 तक एयरलाइंस का घाटा बढ़कर 4,301 करोड़ रुपए हो चुका था। इसी साल माल्या दुनिया के टॉप-100 अमीरों की लिस्ट से बाहर हो गया। लोन के प्रिंसिपल अमाउंट पर ब्याज बढ़ता गया। मार्च 2016 तक माल्या 9,000 करोड़ रुपए का कर्जदार हो गया और विदेश भाग गया।
आर्थिक अपराध के 18 मामलों में 23 भगोड़ों का प्रत्यर्पण बाकी
भारत की 48 देशों के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि है। साल 2014 से अब तक आर्थिक अपराध के मामलों में सिर्फ 5 अपराधियों का प्रत्यपर्ण हो पाया है। 23 भगोड़ों को अभी तक नहीं लाया जा सका है। इनके लिए संबंधित देशों से प्रत्यर्पण की अपील की जा चुकी है।
माल्या पर भारतीयों बैंकों के 9,000 करोड़ रुपए बकाया हैं। वह मार्च 2016 में लंदन भाग गया था। भारत ने पिछले साल फरवरी में यूके से उसके प्रत्यर्पण की अपील की थी। भारत में फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर अप्रैल 2017 में स्कॉटलैंड यार्ड में माल्या की गिरफ्तारी हुई लेकिन, जमानत पर छूट गया। उसके प्रत्यर्पण का मामला 4 दिसंबर 2017 से लंदन की अदालत में चल रहा है।
आगे क्या
यूके की लीगल एक्सपर्ट पावनी रेड्डी के मुताबिक, यूके सरकार अदालत के फैसले से संतुष्ट होती है तो वह माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश जारी करेगी। इस फैसले के खिलाफ माल्या के पास 14 दिन में हाईकोर्ट में अपील का अधिकार होगा।
माल्या ने अगर प्रत्यर्पण के फैसले के खिलाफ अपील नहीं की तो यूके की सरकार के आदेश जारी करने के 28 दिन में उसका प्रत्यर्पण किया जाएगा।
माल्या की 5 दलीलें
माल्या का कहना है कि उसके खिलाफ मामला राजनीति से प्रेरित है। उसने एक रुपया भी उधार नहीं लिया। किंगफिशर एयरलाइंस ने लोन लिया था। कारोबार में घाटा होने की वजह से लोन की रकम खर्च हो गई। वह सिर्फ गारंटर था और यह फ्रॉड नहीं है।
वह कर्ज का 100% मूलधन चुकाने को तैयार है। उसने साल 2016 में कर्नाटक हाईकोर्ट में भी यह ऑफर दिया था। उसका कहना है कि रकम चुराकर भागने की बात गलत है। उसे बैंक डिफॉल्ट का पोस्टर बॉय बना दिया गया है।
माल्या ने यह भी कहा था कि साल 2016 में उसने प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को चिट्ठी लिखकर जांच कमेटी गठित करने की मांग की थी लेकिन, कोई जवाब नहीं मिला।
माल्या ने यह भी कहा था कि भारतीय जेलों की हालत अच्छी नहीं है। इसके बाद यूके की अदालत ने भारत से जेल का वीडियो मांगा था। भारत ने मुंबई की आर्थर रोड जेल के बैरक नंबर 12 का वीडियो भेजा था, जहां माल्या को रखा जाएगा। वीडियो देखने के बाद यूके की कोर्ट ने संतुष्टि जताई थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रत्यर्पण पर फैसले से पहले माल्या ने यह भी कहा है कि राजनीति की वजह से उसे भारत में न्याय मिलने के आसार कम हैं। उसके खिलाफ नए आरोप लग सकते हैं।
भारतीय जांच एजेंसियों की दलील
सीबीआई ने यूके की अदालत के फैसले का स्वागत किया। कहा- हमें उम्मीद है कि माल्या को जल्द भारत लाया जाएगा और हम उसके खिलाफ मामलों में नतीजे पर पहुंचेंगे।
हमने तथ्यों और कानून के आधार पर मजबूती से अपना पक्ष रखा था और हम पूरी तरह आश्वस्त थे कि माल्या को प्रत्यर्पित किया जाएगा।
माल्या ने जानबूझकर बैंकों का कर्ज नहीं चुकाया। वह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत भगोड़ा घोषित है। उस पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है। वह ब्रिटेन के कानून के मुताबिक भी आरोपी है।
अक्टूबर 2012 में किंगफिशर एयरलाइंस बंद हुई
मार्च 2012 में माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस ने यूरोप और एशिया के लिए फ्लाइट्स बंद कर दीं। घरेलू बाजार में जहां किंगफिशर हर दिन 340 फ्लाइट्स ऑपरेट करती थीं, उन्हें घटाकर 125 कर दिया गया। लेकिन यह फॉर्मूला 8 महीने भी नहीं चला। अक्टूबर 2012 में किंगफिशर की सारी फ्लाइट्स बंद हो गईं।
साल 2013-14 तक एयरलाइंस का घाटा बढ़कर 4,301 करोड़ रुपए हो चुका था। इसी साल माल्या दुनिया के टॉप-100 अमीरों की लिस्ट से बाहर हो गया। लोन के प्रिंसिपल अमाउंट पर ब्याज बढ़ता गया। मार्च 2016 तक माल्या 9,000 करोड़ रुपए का कर्जदार हो गया और विदेश भाग गया।
आर्थिक अपराध के 18 मामलों में 23 भगोड़ों का प्रत्यर्पण बाकी
भारत की 48 देशों के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि है। साल 2014 से अब तक आर्थिक अपराध के मामलों में सिर्फ 5 अपराधियों का प्रत्यपर्ण हो पाया है। 23 भगोड़ों को अभी तक नहीं लाया जा सका है। इनके लिए संबंधित देशों से प्रत्यर्पण की अपील की जा चुकी है।
Thursday, November 22, 2018
बेरोजगारी से तंग आकर 4 युवकों ने ट्रेन के आगे लगाई छलांग, 3 की मौत
राजस्थान में बेरोजगारी का भयावह चेहरा सामने आया है, जहां नौकरी नहीं मिलने से हताश 4 युवक जान देने के लिए ट्रेन के आगे कूद गए. इनमें से 3 की जान चली गई. चश्मदीदों के मुताबिक आत्महत्या करने जा रहे युवकों ने कहा कि नौकरी लगेगी नहीं, तो फिर जीवित रह कर क्या करेंगे?
सूबे के अलवर शहर में बुधवार को 6 दोस्तों ने नौकरी नहीं मिलने से परेशान होकर जान देने की प्लानिंग बनाई. इसके बाद चार लोग शहर के एफसीआई गोदाम के पास ट्रेन के आगे कूद गए. इनमें से 3 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया. बाकी दो दोस्तों ने अंतिम समय में आत्महत्या के लिए ट्रेन के आगे कूदने का फैसला बदल दिया, जिसके चलते उनकी जान बच गई.
इन्होंने बताया कि आत्महत्या से पहले सभी का कहना था कि नौकरी तो लगेगी नहीं, जिसके चलते जिंदगी गुजारना मुश्किल है. ऐसे में जीवित रह कर क्या करेंगे? पुलिस इन दोनों से अभी पूछताछ कर रही है. आत्महत्या करने वाले युवकों में से एक सत्यनारायण मीणा ने घटना से कुछ घंटे पहले अपने फेसबुक अकाउंट पर हत्या का वीडियो- ‘माही द किलर’ को अपलोड किया था. इस वीडियो में युवक की हत्या का दृश्य है.
एसपी राजेंद्र सिंह के मुताबिक रानी के बालो को कलां निवासी 24 वर्षीय मनोज मीणा, बुचीपुरी निवासी 22 वर्षीय सत्य नारायण मीणा, बरेला निवासी 17 वर्षीय राज मीणा, टोडाभीम के खेड़ी निवासी 22 वर्षीय अभिषेक मीणा सूबे के अलवर में पढ़ाई कर रहे थे.
ये चारों दोस्त अपने दो अन्य दोस्त संतोष मीणा और राहुल मीणा के साथ मिलकर जिले के श्याम रेलवे ट्रैक के पास बैठकर बातें कर रहे थे. इस दौरान इन सभी 6 लोगों के दिमाग में यह बात आई कि बिना नौकरी के जिंदगी गुजारना मुश्किल है. लिहाजा मौत को गले लगा लेना अच्छा है. इसके बाद 4 दोस्तों ने यह दर्दनाक कदम उठा लिया. मामले में पुलिस का कहना है कि पूरे घटना की तफ्तीश जारी है.
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज बुधवार को चुनावी राज्य मध्य प्रदेश के इंदौर में केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया. केंद्र सरकार पर रोजगार का वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगाया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आक्रामक तेवर और उनके भाषण में विपक्षी नेताओं के खिलाफ बयानबाजी पर प्रधानमंत्री पद की गरिमा के बारे में पूछे जाने पर मनमोहन सिंह ने कहा कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद का ठीक इस्तेमाल नहीं कर रहे. वह जिस तरह से बोलते हैं उनको शोभा नहीं देता. खासकर जब वह कांग्रेस शासित राज्यों में जाते हैं तो वहां खूब बोलते हैं जो ठीक बात नहीं. उन्हें पद की गरिमा रखनी चाहिए.
नोटबंदी लूट का हिस्सा
नोटबंदी पर बोलते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, 'मैंने पहले ही संसद में कहा था कि यह संगठित लूट का हिस्सा है.' जबकि जीएसटी पर उन्होंने कहा कि इसे बगैर पूरी तैयारी और खास योजना के साथ लागू किया गया.
10 साल तक केंद्र में यूपीए सरकार का नेतृत्व करने वाले मनमोहन सिंह ने खुद को रिमोट सरकार कहे जाने की बात को खारिज करते हुए कहा कि हमारी सरकार की कोशिश यह थी कि सबको साथ लेकर चला जाए. हम सबको साथ लेकर चले, यही कारण रहा कि सरकार और पार्टी के बीच किसी तरह का कोई अंतर नहीं रहा.
सूबे के अलवर शहर में बुधवार को 6 दोस्तों ने नौकरी नहीं मिलने से परेशान होकर जान देने की प्लानिंग बनाई. इसके बाद चार लोग शहर के एफसीआई गोदाम के पास ट्रेन के आगे कूद गए. इनमें से 3 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया. बाकी दो दोस्तों ने अंतिम समय में आत्महत्या के लिए ट्रेन के आगे कूदने का फैसला बदल दिया, जिसके चलते उनकी जान बच गई.
इन्होंने बताया कि आत्महत्या से पहले सभी का कहना था कि नौकरी तो लगेगी नहीं, जिसके चलते जिंदगी गुजारना मुश्किल है. ऐसे में जीवित रह कर क्या करेंगे? पुलिस इन दोनों से अभी पूछताछ कर रही है. आत्महत्या करने वाले युवकों में से एक सत्यनारायण मीणा ने घटना से कुछ घंटे पहले अपने फेसबुक अकाउंट पर हत्या का वीडियो- ‘माही द किलर’ को अपलोड किया था. इस वीडियो में युवक की हत्या का दृश्य है.
एसपी राजेंद्र सिंह के मुताबिक रानी के बालो को कलां निवासी 24 वर्षीय मनोज मीणा, बुचीपुरी निवासी 22 वर्षीय सत्य नारायण मीणा, बरेला निवासी 17 वर्षीय राज मीणा, टोडाभीम के खेड़ी निवासी 22 वर्षीय अभिषेक मीणा सूबे के अलवर में पढ़ाई कर रहे थे.
ये चारों दोस्त अपने दो अन्य दोस्त संतोष मीणा और राहुल मीणा के साथ मिलकर जिले के श्याम रेलवे ट्रैक के पास बैठकर बातें कर रहे थे. इस दौरान इन सभी 6 लोगों के दिमाग में यह बात आई कि बिना नौकरी के जिंदगी गुजारना मुश्किल है. लिहाजा मौत को गले लगा लेना अच्छा है. इसके बाद 4 दोस्तों ने यह दर्दनाक कदम उठा लिया. मामले में पुलिस का कहना है कि पूरे घटना की तफ्तीश जारी है.
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज बुधवार को चुनावी राज्य मध्य प्रदेश के इंदौर में केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया. केंद्र सरकार पर रोजगार का वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगाया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आक्रामक तेवर और उनके भाषण में विपक्षी नेताओं के खिलाफ बयानबाजी पर प्रधानमंत्री पद की गरिमा के बारे में पूछे जाने पर मनमोहन सिंह ने कहा कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद का ठीक इस्तेमाल नहीं कर रहे. वह जिस तरह से बोलते हैं उनको शोभा नहीं देता. खासकर जब वह कांग्रेस शासित राज्यों में जाते हैं तो वहां खूब बोलते हैं जो ठीक बात नहीं. उन्हें पद की गरिमा रखनी चाहिए.
नोटबंदी लूट का हिस्सा
नोटबंदी पर बोलते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, 'मैंने पहले ही संसद में कहा था कि यह संगठित लूट का हिस्सा है.' जबकि जीएसटी पर उन्होंने कहा कि इसे बगैर पूरी तैयारी और खास योजना के साथ लागू किया गया.
10 साल तक केंद्र में यूपीए सरकार का नेतृत्व करने वाले मनमोहन सिंह ने खुद को रिमोट सरकार कहे जाने की बात को खारिज करते हुए कहा कि हमारी सरकार की कोशिश यह थी कि सबको साथ लेकर चला जाए. हम सबको साथ लेकर चले, यही कारण रहा कि सरकार और पार्टी के बीच किसी तरह का कोई अंतर नहीं रहा.
Monday, November 12, 2018
कम बच्चे पैदा करने से क्या नुकसान होगा
कहते हैं कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं लेकिन अगर बच्चे न हों तो किसी भी देश का भविष्य ख़तरे में पड़ सकता है.
इसी ख़तरे की ओर इशारा करता एक शोध सामने आया है जिसके मुताबिक महिलाओं की प्रजनन दर में कमी आई है.
शोधकर्ताओं के मुताबिक इस शोध के नतीजे हैरान करने वाले हैं और इसके समाज पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं जहां बच्चों से ज़्यादा दादा-दादी होने वाले हैं.
शोध पर आधारित रिपोर्ट कहती है कि प्रजनन दर कम होने का मतलब है कि आधे से ज़्यादा देशों में जन्म दर का अस्थायी तौर पर कम होना. इसका मतलब होगा कि इन देशों में उनकी आबादी का विस्तार बनाए रखने के लिए पर्याप्त बच्चे नहीं हैं.
'द लांसेट' में छपे इस अध्ययन में हर देश में साल 1950 से 2017 के बीच ट्रेंड पर नज़र रखी गई. साल 1950 में महिलाएं अपने पूरे जीवन में औसतन 4.7 बच्चों को जन्म देती थीं. लेकिन, पिछले साल तक यह प्रजनन दर आधी होकर 2.4 बच्चों पर आ गई.
हालांकि, अलग-अलग देशों के मुताबिक इसमें काफ़ी अंतर देखने को मिलता है.
नाइजर और पश्चिमी अफ़्रीका में प्रजनन दर 7.1 है लेकिन साइप्रस के भूमध्य द्वीप पर महिलाएं औसतन एक ही बच्चे को जन्म देती हैं.
कितनी हो प्रजनन दर
जब भी किसी देश में प्रजनन दर 2.1 से नीचे आती है तो जनसंख्या सिकुड़नी शुरू हो जाती है. ख़ास तौर से उन देशों में जहां बाल मृत्यु दर ज़्यादा है.
1950 में जब ये अध्ययन शुरू हुआ तो कोई भी देश इस श्रेणी में नहीं था.
यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन में इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के डायरेक्टर प्रोफेसर क्रिस्टफर मुरै ने बीबीसी से कहा, ''हम उस स्थिति में पहुंच गए हैं जब प्रजनन दर रिप्लेसमेंट लेवल के नीचे है. इसलिए अगर कुछ नहीं किया गया तो उन देशों में जनसंख्या कम हो जाएगी. यह बड़ा बदलाव है.''
कौन-से देश प्रभावित
आर्थिक रूप से विकसित देश जैसे यूरोप, अमरीका, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया आदि में प्रजनन दर कम है.
इसका यह मतलब नहीं है कि इन देशों में रह रहे लोगों की संख्या कम हो रही है. कम से कम अभी तक तो नहीं क्योंकि यहां जनसंख्या का आकार प्रजनन दर, मृत्यु दर और प्रवासन का मिश्रण होता है.
हालांकि, प्रजनन दर में कमी का फिलहाल ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा. इसके लिए कई पीढ़ियों तक लगातार बदलाव की ज़रूरत होगी.
लेकिन प्रोफेसर मुरै कहते हैं, ''हम जल्द ही उस स्थिति में पहुंच जाएंगे जहां समाज जनसंख्या में कमी से जूझ रहा होगा.''
आधे से ज़्यादा देशों में पर्याप्त बच्चों का जन्म हो रहा है. लेकिन देश जितना आर्थिक रूप से वृद्धि करते हैं, उतनी ही प्रजनन दर कम होती है.
इसी ख़तरे की ओर इशारा करता एक शोध सामने आया है जिसके मुताबिक महिलाओं की प्रजनन दर में कमी आई है.
शोधकर्ताओं के मुताबिक इस शोध के नतीजे हैरान करने वाले हैं और इसके समाज पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं जहां बच्चों से ज़्यादा दादा-दादी होने वाले हैं.
शोध पर आधारित रिपोर्ट कहती है कि प्रजनन दर कम होने का मतलब है कि आधे से ज़्यादा देशों में जन्म दर का अस्थायी तौर पर कम होना. इसका मतलब होगा कि इन देशों में उनकी आबादी का विस्तार बनाए रखने के लिए पर्याप्त बच्चे नहीं हैं.
'द लांसेट' में छपे इस अध्ययन में हर देश में साल 1950 से 2017 के बीच ट्रेंड पर नज़र रखी गई. साल 1950 में महिलाएं अपने पूरे जीवन में औसतन 4.7 बच्चों को जन्म देती थीं. लेकिन, पिछले साल तक यह प्रजनन दर आधी होकर 2.4 बच्चों पर आ गई.
हालांकि, अलग-अलग देशों के मुताबिक इसमें काफ़ी अंतर देखने को मिलता है.
नाइजर और पश्चिमी अफ़्रीका में प्रजनन दर 7.1 है लेकिन साइप्रस के भूमध्य द्वीप पर महिलाएं औसतन एक ही बच्चे को जन्म देती हैं.
कितनी हो प्रजनन दर
जब भी किसी देश में प्रजनन दर 2.1 से नीचे आती है तो जनसंख्या सिकुड़नी शुरू हो जाती है. ख़ास तौर से उन देशों में जहां बाल मृत्यु दर ज़्यादा है.
1950 में जब ये अध्ययन शुरू हुआ तो कोई भी देश इस श्रेणी में नहीं था.
यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन में इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के डायरेक्टर प्रोफेसर क्रिस्टफर मुरै ने बीबीसी से कहा, ''हम उस स्थिति में पहुंच गए हैं जब प्रजनन दर रिप्लेसमेंट लेवल के नीचे है. इसलिए अगर कुछ नहीं किया गया तो उन देशों में जनसंख्या कम हो जाएगी. यह बड़ा बदलाव है.''
कौन-से देश प्रभावित
आर्थिक रूप से विकसित देश जैसे यूरोप, अमरीका, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया आदि में प्रजनन दर कम है.
इसका यह मतलब नहीं है कि इन देशों में रह रहे लोगों की संख्या कम हो रही है. कम से कम अभी तक तो नहीं क्योंकि यहां जनसंख्या का आकार प्रजनन दर, मृत्यु दर और प्रवासन का मिश्रण होता है.
हालांकि, प्रजनन दर में कमी का फिलहाल ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा. इसके लिए कई पीढ़ियों तक लगातार बदलाव की ज़रूरत होगी.
लेकिन प्रोफेसर मुरै कहते हैं, ''हम जल्द ही उस स्थिति में पहुंच जाएंगे जहां समाज जनसंख्या में कमी से जूझ रहा होगा.''
आधे से ज़्यादा देशों में पर्याप्त बच्चों का जन्म हो रहा है. लेकिन देश जितना आर्थिक रूप से वृद्धि करते हैं, उतनी ही प्रजनन दर कम होती है.
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