राजस्थान में बेरोजगारी का भयावह चेहरा सामने आया है, जहां नौकरी नहीं मिलने से हताश 4 युवक जान देने के लिए ट्रेन के आगे कूद गए. इनमें से 3 की जान चली गई. चश्मदीदों के मुताबिक आत्महत्या करने जा रहे युवकों ने कहा कि नौकरी लगेगी नहीं, तो फिर जीवित रह कर क्या करेंगे?
सूबे के अलवर शहर में बुधवार को 6 दोस्तों ने नौकरी नहीं मिलने से परेशान होकर जान देने की प्लानिंग बनाई. इसके बाद चार लोग शहर के एफसीआई गोदाम के पास ट्रेन के आगे कूद गए. इनमें से 3 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया. बाकी दो दोस्तों ने अंतिम समय में आत्महत्या के लिए ट्रेन के आगे कूदने का फैसला बदल दिया, जिसके चलते उनकी जान बच गई.
इन्होंने बताया कि आत्महत्या से पहले सभी का कहना था कि नौकरी तो लगेगी नहीं, जिसके चलते जिंदगी गुजारना मुश्किल है. ऐसे में जीवित रह कर क्या करेंगे? पुलिस इन दोनों से अभी पूछताछ कर रही है. आत्महत्या करने वाले युवकों में से एक सत्यनारायण मीणा ने घटना से कुछ घंटे पहले अपने फेसबुक अकाउंट पर हत्या का वीडियो- ‘माही द किलर’ को अपलोड किया था. इस वीडियो में युवक की हत्या का दृश्य है.
एसपी राजेंद्र सिंह के मुताबिक रानी के बालो को कलां निवासी 24 वर्षीय मनोज मीणा, बुचीपुरी निवासी 22 वर्षीय सत्य नारायण मीणा, बरेला निवासी 17 वर्षीय राज मीणा, टोडाभीम के खेड़ी निवासी 22 वर्षीय अभिषेक मीणा सूबे के अलवर में पढ़ाई कर रहे थे.
ये चारों दोस्त अपने दो अन्य दोस्त संतोष मीणा और राहुल मीणा के साथ मिलकर जिले के श्याम रेलवे ट्रैक के पास बैठकर बातें कर रहे थे. इस दौरान इन सभी 6 लोगों के दिमाग में यह बात आई कि बिना नौकरी के जिंदगी गुजारना मुश्किल है. लिहाजा मौत को गले लगा लेना अच्छा है. इसके बाद 4 दोस्तों ने यह दर्दनाक कदम उठा लिया. मामले में पुलिस का कहना है कि पूरे घटना की तफ्तीश जारी है.
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज बुधवार को चुनावी राज्य मध्य प्रदेश के इंदौर में केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया. केंद्र सरकार पर रोजगार का वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगाया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आक्रामक तेवर और उनके भाषण में विपक्षी नेताओं के खिलाफ बयानबाजी पर प्रधानमंत्री पद की गरिमा के बारे में पूछे जाने पर मनमोहन सिंह ने कहा कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद का ठीक इस्तेमाल नहीं कर रहे. वह जिस तरह से बोलते हैं उनको शोभा नहीं देता. खासकर जब वह कांग्रेस शासित राज्यों में जाते हैं तो वहां खूब बोलते हैं जो ठीक बात नहीं. उन्हें पद की गरिमा रखनी चाहिए.
नोटबंदी लूट का हिस्सा
नोटबंदी पर बोलते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, 'मैंने पहले ही संसद में कहा था कि यह संगठित लूट का हिस्सा है.' जबकि जीएसटी पर उन्होंने कहा कि इसे बगैर पूरी तैयारी और खास योजना के साथ लागू किया गया.
10 साल तक केंद्र में यूपीए सरकार का नेतृत्व करने वाले मनमोहन सिंह ने खुद को रिमोट सरकार कहे जाने की बात को खारिज करते हुए कहा कि हमारी सरकार की कोशिश यह थी कि सबको साथ लेकर चला जाए. हम सबको साथ लेकर चले, यही कारण रहा कि सरकार और पार्टी के बीच किसी तरह का कोई अंतर नहीं रहा.
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