Monday, November 12, 2018

कम बच्चे पैदा करने से क्या नुकसान होगा

कहते हैं कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं लेकिन अगर बच्चे न हों तो किसी भी देश का भविष्य ख़तरे में पड़ सकता है.

इसी ख़तरे की ओर इशारा करता एक शोध सामने आया है जिसके मुताबिक महिलाओं की प्रजनन दर में कमी आई है.

शोधकर्ताओं के मुताबिक इस शोध के नतीजे हैरान करने वाले हैं और इसके समाज पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं जहां बच्चों से ज़्यादा दादा-दादी होने वाले हैं.

शोध पर आधारित रिपोर्ट कहती है कि प्रजनन दर कम होने का मतलब है कि आधे से ज़्यादा देशों में जन्म ​दर का अस्थायी तौर पर कम होना. इसका मतलब होगा कि इन देशों में उनकी आबादी का विस्तार बनाए रखने के लिए पर्याप्त बच्चे नहीं हैं.

'द लांसेट' में छपे इस अध्ययन में हर देश में साल 1950 से 2017 के बीच ट्रेंड पर नज़र रखी गई. साल 1950 में महिलाएं अपने पूरे जीवन में औसतन 4.7 बच्चों को जन्म देती थीं. लेकिन, पिछले साल तक यह प्रजनन दर आधी होकर 2.4 बच्चों पर आ गई.

हालांकि, अलग-अलग देशों के मुताबिक इसमें काफ़ी अंतर देखने को मिलता है.

नाइजर और पश्चिमी अफ़्रीका में प्रजनन दर 7.1 है लेकिन साइप्रस के भूमध्य द्वीप पर महिलाएं औसतन एक ही बच्चे को जन्म देती हैं.

कितनी हो प्रजनन दर
जब भी किसी देश में प्रजनन दर 2.1 से नीचे आती है तो जनसंख्या सिकुड़नी शुरू हो जाती है. ख़ास तौर से उन देशों में जहां बाल मृत्यु दर ज़्यादा है.

1950 में जब ये अध्ययन शुरू हुआ तो कोई भी देश इस श्रेणी में नहीं था.

यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन में इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के डायरेक्टर प्रोफेसर क्रिस्टफर मुरै ने बीबीसी से कहा, ''हम उस स्थिति में पहुंच गए हैं जब प्रजनन दर रिप्लेसमेंट लेवल के नीचे है. इसलिए अगर कुछ नहीं किया गया तो उन देशों में जनसंख्या कम हो जाएगी. यह बड़ा बदलाव है.''

कौन-से देश प्रभावित
आर्थिक रूप से विकसित देश जैसे यूरोप, अमरीका, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया आदि में प्रजनन दर कम है.

इसका यह मतलब नहीं है कि इन देशों में रह रहे लोगों की संख्या कम हो रही है. कम से कम अभी तक तो नहीं क्योंकि यहां जनसंख्या का आकार प्रजनन दर, मृत्यु दर और प्रवासन का मिश्रण होता है.

हालांकि, प्रजनन दर में कमी का फिलहाल ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा. इसके लिए कई पीढ़ियों तक लगातार बदलाव की ज़रूरत होगी.

लेकिन प्रोफेसर मुरै कहते हैं, ''हम जल्द ही उस स्थिति में पहुंच जाएंगे जहां समाज जनसंख्या में कमी से जूझ रहा होगा.''

आधे से ज़्यादा देशों में पर्याप्त बच्चों का जन्म हो रहा है. लेकिन देश जितना आर्थिक रूप से वृद्धि करते हैं, उतनी ही प्रजनन दर कम होती है.

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